कोरबा/ 08/june 26 // कटघोरा वनमंडल के पसान वन परिक्षेत्र में जंगली सुअर के शिकार से जुड़ा मामला अब वन विभाग के लिए बड़ी मुश्किल बनता जा रहा है। शिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के बीच वन विभाग के कर्मचारियों पर कथित वसूली के आरोप लगने से हड़कंप मच गया है। मामले में डिप्टी रेंजर उषा सोनवानी का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद डीएफओ कुमार निशांत ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, मामला पसान वन परिक्षेत्र की लैंगा बीट अंतर्गत कर्री गांव का है। बताया जा रहा है कि कुछ ग्रामीणों ने जंगली सुअर का शिकार किया था और उसके बाद गांव में पार्टी की तैयारी चल रही थी। इसकी सूचना मिलने पर फॉरेस्ट गार्ड राम कुमार कोराम अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और कार्रवाई की। वन विभाग ने शिकार में शामिल कुछ लोगों के खिलाफ वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया और शिकार में इस्तेमाल सामग्री भी जब्त की।
इसी बीच पूरे मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब सोशल मीडिया पर एक कथित स्टिंग वीडियो वायरल हो गया। वायरल वीडियो में डिप्टी रेंजर लैंगा उषा सोनवानी कुछ ग्रामीणों के साथ बैठी नजर आ रही हैं। वीडियो में कथित तौर पर यह चर्चा हो रही है कि शिकारियों से पैसे लिए गए थे और कुछ आरोपियों को बचाने के लिए लेन-देन किया गया। हालांकि वीडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इसके सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पसान रेंजर मनीष सिंह करेंगे जांच
मामले को लेकर कोरबा डीएफओ कुमार निशांत ने कहा कि वायरल वीडियो की जानकारी उन्हें मिली है। पूरे मामले की जांच के लिए पसान रेंजर मनीष सिंह को निर्देशित किया गया है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कोई भी कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि कोरबा जिले में वन्य जीवों के शिकार के कई मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। वन विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है, लेकिन इस बार विभाग के कर्मचारियों पर ही सवाल उठने से मामला चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई के नाम पर कुछ कर्मचारियों द्वारा अवैध वसूली की जाती है। वहीं वन विभाग निष्पक्ष जांच का दावा कर रहा है।
फिलहाल वायरल वीडियो और वसूली के आरोपों ने पूरे वन विभाग की साख को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह साफ होगा कि वायरल वीडियो में किए गए दावों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में शिकारियों को बचाने के लिए लेन-देन हुआ था।
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