कोरबा/पसान। पसान के बहुचर्चित शासकीय रंगमंच विवाद में तहसीलदार की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद भी स्थानीय स्तर पर राजनीतिक चुप्पी चर्चा का विषय बनी हुई है। जनहित और शासकीय संपत्ति से जुड़े इस मामले में अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर स्थानीय जनप्रतिनिधि और विभिन्न राजनीतिक दलों के पदाधिकारी खुलकर अपनी बात क्यों नहीं रख रहे हैं।
जनता पूछ रही सवाल: जनहित के मुद्दे पर सांसद-विधायक प्रतिनिधि आखिर मौन क्यों?
तहसीलदार की जांच रिपोर्ट में बिना अनुमति रंगमंच तोड़े जाने का उल्लेख किया गया है। वहीं सीमांकन संबंधी तथ्यों ने भी मामले को और गंभीर बना दिया है। इसके बावजूद अब तक इस विषय पर किसी बड़े जनआंदोलन या सार्वजनिक विरोध की तस्वीर सामने नहीं आई है।
तहसीलदार की जांच रिपोर्ट के बाद पसान रंगमंच भूमि विवाद फिर चर्चा में है। जनहित के इस मुद्दे पर नेताओं की चुप्पी और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि मामला शासकीय संपत्ति और सार्वजनिक हित से जुड़ा है, तो सभी जनप्रतिनिधियों को निष्पक्ष होकर अपनी बात रखनी चाहिए। लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या प्रभावशाली लोगों से जुड़े मामलों में राजनीतिक दल खुलकर आवाज़ उठाने से बच रहे हैं।
हालांकि, यह भी उल्लेखनीय है कि अब तक किसी जनप्रतिनिधि द्वारा सार्वजनिक रूप से इस मामले पर क्या रुख अपनाया गया है, इसका आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए किसी व्यक्ति या दल के उद्देश्य पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि जांच रिपोर्ट के बाद प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे या नहीं। जनहित से जुड़े इस विवाद में आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर पूरे क्षेत्र की नजर बनी हुई है।
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