कोरबा/पसान। पसान के चर्चित 70 वर्ष पुराने शासकीय सांस्कृतिक रंगमंच से जुड़े भूमि विवाद में अब ऐसे दस्तावेज़ सामने आए हैं, जिन्होंने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। उपलब्ध दस्तावेज़ों के अनुसार, रंगमंच से सटे मोची की दुकान की भूमि को पहले शासकीय भूमि ( 408/1 ) मानते हुए मोची के विरुद्ध राजस्व कार्रवाई की गई थी और उस पर जुर्माना भी लगाया गया था। अब आरोप है कि उसी क्षेत्र के हिस्से को ( 408/23 )निजी भूमि बताकर कब्जा और निर्माण की अनुमति दी गई है।

दस्तावेज़ों के अनुसार, वर्ष 1994 से 2021 तक राजस्व विभाग द्वारा मोची के विरुद्ध कार्रवाई की गई, उसे हटाया गया और जुर्माना (50,100,1000, रूपये )भी वसूला गया। उस समय संबंधित भूमि को शासकीय माना गया था।
वहीं दूसरी ओर, हाल के रंगमंच विवाद में तहसीलदार की जांच रिपोर्ट में यह उल्लेख है कि रंगमंच को बिना अनुमति तोड़ा गया, जबकि अनावेदक के द्वारा कराए गए रिपोर्ट को भी माने तो सीमांकन के अनुसार उसका केवल आंशिक भाग ही संबंधित निजी भूमि से जुड़ा बताया गया है।
अब उठ रहे हैं बड़े सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि पहले इसी क्षेत्र को शासकीय भूमि मानकर कार्रवाई की गई थी, तो अब उसी क्षेत्र के संबंध में अलग स्थिति कैसे सामने आ रही है?
लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि—
क्या पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होगी?
क्या पुराने राजस्व रिकॉर्ड, नक्शे और सीमांकन काa पुनः परीक्षण कराया जाएगा?
यदि रिकॉर्ड में विरोधाभास है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
क्या शासकीय भूमि और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी?
जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें
अब निगाहें जिला प्रशासन और राजस्व विभाग पर हैं। यदि उपलब्ध दस्तावेज़ों में वास्तव में विरोधाभास पाया जाता है, तो प्रशासन के सामने यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित भूमि की वास्तविक स्थिति क्या है और आगे कौन-सी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
नोट: यह समाचार उपलब्ध कराए गए दस्तावेज़ों और दावों पर आधारित है। किसी व्यक्ति या अधिकारी के विरुद्ध आरोपों की पुष्टि का अंतिम निर्णय सक्षम प्रशासनिक प्राधिकारी या न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा।
Read link 👇👇










