जांजगीर-चांपा. परिवार नियोजन प्रोत्साहन राशि के नाम पर फर्जी जब भुगतान करने 8.80 लाख गुपचुप हड़पने की तैयारी थी, लेकिन जब मामला लीक हुआ तो मौजूदा सिविल सर्जन ने खाता सीज कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि जिम्मेदार अफसरों ने इतनी भारी भरकम राशि भृत्य व स्वीपर के खाते में डाल दिया था, फिर यह राशि निकाल भी ली। मामला जब तूल पकड़ा और जगजाहिर हुआ तो जिम्मेदारों ने फिर उसी खाते में जमा कर दिया। ऐसे में पूरे मामले का भंडाफोड़ होने के बाद उक्त खाते को फ्रीज कर दिया गया है।
आपदा को अवसर बनाकर सरकारी राशि में किस तरह बंदरबांट किया जाता है, यह गुर ‘धरती के भगवान’ कहे जाने वाले अफसरों से ही सीखा जा सकता है। सरकार एक और सेहत के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च करती है वहीं दूसरी ओर ऐसी राशि में अफसर खुलकर बंदरबांट करते हैं। फर्जीवाड़ा का कुछ ऐसा ही मामला जिला अस्पताल में सामने आया है। दरअसल, जिला अस्पताल जांजगीर के अफसरों ने फर्जीवाड़ा कर लाखों रुपए गबन करने के फिराक में थे। तत्कालीन सिविलसर्जन व मौजूदा अस्पताल सलाहकार दोनों मिलकर परिवार नियोजन (सीटीटी, पीपीएस, एनएसवीटी) आपरेशन का प्रोत्साहन राशि तितानिनों को देने के नाम पर अच्छी चाल चली लेकिन वे कामयाब नहीं हो पाए। दरअसल, फंड में बड़ी राशि जमा थी जिसे निकालने के लिए भारी भरकम फंड को मितानिन चन्दनमामले की जानकारी विधायक विधायक व्यास कश्यप को हुई तब उन्होंने मुद्दे को विधानसभा में उठाया। इससे मामला जग जाहिर हुआ। अफसरों ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यी टीम बनाई है। लेकिन विभागीय अफसरों ने केवल खाता फ्रीज कर कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। अब तक जांच भी शुरू नहीं हुई है
परिवार नियोजन प्रोत्साहन राशि के नाम पर 8.80 लाख भुगतान करने की तैयारी थी, लेकिन पुनि मामले की शिकायत के बाद खाता फ्रीज कर दिया गया है। आगे जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उस हिसाब से आगे की कार्रवाई की जाएगी।
–डॉ. बृजमोहन जागृति, सिविल सर्जन जांजगीर
जिला अस्पताल में 8.80 लाख रुपए का फर्जीवाड़ा उजागर होने का मामला मैने विधानसभा में उठाया था। मुद्दा उठने के बाद अफसरों ने जांच टीम बनाई है। लेकिन अब तक जांच अधर में है।
– ब्यास कश्यप, विधायक
जांजगीर-चांपा
आगे क्या?
विधानसभा में मामला गूंजने के बाद अफसरों के हाथ पांव फूल गए हैं। इतनी भारी भरकम राशि को न तो पचाने पा रहे हैं और न ही निकाल पा रहे हैं। मामला अब ठंडे बस्ते में चला गया है। सूत्रों का दावा है कि यदि इतनी बड़ी गड़बड़ी की सही सलामत जांच हो जाए तो दोनों ही जिम्मेदार अफसरों पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है। लेकिन विडंबना यह है कि दोनों ही अफसर अपने आप को पहुंच वाले बता रहे हैं, इसलिए मामला ठप है










