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Snake Bite: बारिश में बढ़ा सांप के काटने का खतरा, घबराहट नहीं सही कदम बचा सकता है जान; जानिए क्या करें और क्या बिल्कुल न करें

CGCITYNEWS // मानसून के साथ खेतों, बाड़ियों और रिहायशी इलाकों में सांपों की आवाजाही बढ़ जाती है। हर साल बड़ी संख्या में लोग सांप के काटने का शिकार होते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में मौत जहर से पहले घबराहट और गलत प्राथमिक उपचार की वजह से होती है। इसलिए यह समझना बेहद जरूरी है कि सांप के काटने के बाद शरीर में क्या होता है और मरीज की मदद किस तरह की जानी चाहिए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अधिकांश लोगों की धारणा होती है कि सांप का जहर काटते ही खून के जरिए पूरे शरीर में फैल जाता है। जबकि विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसा हमेशा नहीं होता। जहर पहले त्वचा के नीचे और आसपास के ऊतकों में पहुंचता है। इसके बाद वह शरीर की लसिका (लिम्फ) प्रणाली के माध्यम से धीरे-धीरे आगे बढ़ता है। यदि पीड़ित व्यक्ति दौड़ने, घबराने या बार-बार हाथ-पैर हिलाने लगता है तो मांसपेशियों की गतिविधि बढ़ने से जहर तेजी से शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि मरीज को शांत रखना और प्रभावित अंग को स्थिर रखना प्राथमिक उपचार का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

हर सांप का जहर एक जैसा नहीं होता

विशेषज्ञों के अनुसार अलग-अलग विषैले सांपों का जहर शरीर पर अलग तरह से असर डालता है। कुछ सांपों का विष सीधे तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। ऐसे मामलों में मरीज की पलकों का झुकना, बोलने में कठिनाई, निगलने में परेशानी और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।कुछ प्रजातियों का जहर रक्त के थक्के बनने की क्षमता को प्रभावित करता है। इसके कारण मसूड़ों, नाक या घाव से लगातार रक्तस्राव हो सकता है और अंदरूनी रक्तस्राव का खतरा भी बढ़ जाता है। वहीं कुछ विष ऐसे होते हैं जो काटे गए स्थान के आसपास की मांसपेशियों और ऊतकों को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे तेज दर्द, सूजन और त्वचा के खराब होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

सांप काटने पर सबसे पहले क्या करें

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि सबसे पहले मरीज को भरोसा दिलाएं कि समय पर अस्पताल पहुंचने से इलाज संभव है। घबराहट कम करना उतना ही जरूरी है जितना अस्पताल पहुंचना। यदि हाथ या पैर में सांप ने काटा है तो उस हिस्से को जितना हो सके स्थिर रखें। मरीज को चलने से बचाएं और जरूरत हो तो स्ट्रेचर या वाहन की मदद से अस्पताल ले जाएं। सूजन बढ़ने की आशंका को देखते हुए अंगूठी, कड़ा, घड़ी, चूड़ी या तंग जूते जैसी चीजें तुरंत उतार दें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मरीज को बिना समय गंवाए ऐसे अस्पताल पहुंचाया जाए जहां एंटी-स्नेक वेनम (ASV) उपलब्ध हो।

ये गलतियां जानलेवा साबित हो सकती हैं

आज भी कई ग्रामीण इलाकों में सांप काटने के बाद झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू उपायों पर भरोसा किया जाता है। चिकित्सकों के अनुसार इससे इलाज में देरी होती है और मरीज की हालत बिगड़ सकती है।

विशेषज्ञ इन गलतियों से बचने की सलाह देते हैं :-

  • काटे गए स्थान पर रस्सी या कपड़ा कसकर न बांधें।
  • घाव को चाकू या ब्लेड से काटने की कोशिश न करें।
  • मुंह से जहर चूसने का प्रयास बिल्कुल न करें।
  • बर्फ, मिट्टी, चुना, तेल या जड़ी-बूटी लगाने से बचें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा या शराब न दें।

हर सांप विषैला नहीं होता, लेकिन जोखिम लेना खतरनाक

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में मिलने वाली सभी प्रजातियां जहरीली नहीं होतीं, लेकिन केवल देखकर यह तय करना लगभग असंभव है कि काटने वाला सांप विषैला था या नहीं। इसलिए हर स्नेक बाइट को मेडिकल इमरजेंसी मानते हुए तुरंत अस्पताल पहुंचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।

विशेषज्ञों की सलाह

बारिश के मौसम में खेतों, लकड़ी के ढेर, झाड़ियों और पानी भरे इलाकों में काम करते समय ऊंचे जूते पहनें, रात में टॉर्च का इस्तेमाल करें और घर के आसपास झाड़ियां व कचरा जमा न होने दें। सावधानी और सही प्राथमिक उपचार से स्नेक बाइट से होने वाली कई मौतों को रोका जा सकता है।

अस्वीकरण: यह लेख केवल जन-जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी आपात स्थिति में स्वयं उपचार करने के बजाय तुरंत नजदीकी अस्पताल या योग्य चिकित्सक से संपर्क करें।

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Author: CG City News

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