रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग ने संकुल समन्वयकों की नियुक्ति और कार्यप्रणाली को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। नए नियमों के अनुसार अब संकुल समन्वयकों को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियां ही नहीं निभानी होंगी, बल्कि उन्हें प्रतिदिन कम से कम तीन पीरियड कक्षा में पढ़ाना भी अनिवार्य होगा।
नई व्यवस्था के तहत संकुल समन्वयक बनने के लिए केवल वरिष्ठता या अनुभव ही पर्याप्त नहीं होगा। अभ्यर्थी को कंप्यूटर और एंड्रॉयड मोबाइल चलाने का ज्ञान होना भी जरूरी रहेगा।
डिजिटल डेटा अपडेट की जिम्मेदारी
संकुल समन्वयकों को शालाकोष और यू-डाइस पोर्टल पर स्कूलों का डिजिटल डेटा समय-समय पर अपडेट करना होगा। साथ ही विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति की निगरानी, कमजोर छात्रों के लिए सुधारात्मक शिक्षण तथा विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों का समन्वय भी उनकी जिम्मेदारी होगी।
ये होंगे प्रमुख कार्य
प्रतिदिन 3 पीरियड अध्यापन।
शालाकोष और यू-डाइस पोर्टल पर डेटा अपडेट।
शिक्षकों और विद्यार्थियों की नियमित निगरानी।
लर्निंग आउटकम में सुधार पर विशेष ध्यान।
मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता और उपलब्धता की मॉनिटरिंग।
संकुल स्तर पर शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन।
बैंक खाते के संचालन में संकुल प्रभारी के साथ संयुक्त जिम्मेदारी।
एकल शिक्षक स्कूलों से नहीं होगा चयन
विभाग ने स्पष्ट किया है कि एकल शिक्षक और द्विशिक्षकीय स्कूलों से किसी भी शिक्षक को संकुल समन्वयक नहीं बनाया जाएगा, ताकि विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित न हो।
कलेक्टर की मंजूरी के बाद होगी नियुक्ति
संकुल समन्वयकों के चयन के लिए जिला स्तर पर समिति गठित की जाएगी। समिति की अनुशंसा के बाद कलेक्टर एवं पदेन जिला मिशन संचालक की मंजूरी मिलने पर ही नियुक्ति की जाएगी।
शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में होगी वैकल्पिक व्यवस्था
यदि किसी विद्यालय में शिक्षक की कमी है तो वहां वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि संकुल समन्वयक बनने के बाद भी संबंधित शिक्षक को अपने मूल विद्यालय में नियमित अध्यापन करना होगा।
यदि किसी विद्यालय में शिक्षक की कमी है तो वहां वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि संकुल समन्वयक बनने के बाद भी संबंधित शिक्षक को अपने मूल विद्यालय में नियमित अध्यापन करना होगा।
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