कोरबा/पसान। पसान में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर स्थित लगभग 70 वर्ष पुराने सांस्कृतिक रंगमंच को तोड़े जाने के मामले में तहसीलदार की जांच रिपोर्ट ने कई अहम तथ्यों को सामने रखा है। जांच प्रतिवेदन के अनुसार, रंगमंच को बिना सक्षम अनुमति के जेसीबी मशीन से तोड़ा गया, जबकि अनावेदक द्वारा उपलब्ध कराए गए सीमांकन रिपोर्ट की माने तो भी उस आधार पर रंगमंच का केवल आंशिक भाग ही आवेदक की भूमि से संबंधित बताया गया है।

तहसीलदार द्वारा एसडीएम पोड़ी- उपरोड़ा को भेजे गए जांच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि मामले की जांच के दौरान राजस्व अभिलेख, सीमांकन रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित व्यक्ति द्वारा बिना अनुमति शासकीय संरचना को ध्वस्त किया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि सीमांकन रिपोर्ट के अनुसार विवादित रंगमंच का पूरा हिस्सा निजी भूमि में नहीं आता। ऐसे में पूरे शासकीय रंगमंच को तोड़े जाने पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
इस मामले को लेकर पहले ही विद्यालय प्रबंधन, स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रशासन से कार्रवाई की मांग की जा चुकी है। हाल ही में स्थानीय नागरिक ने भी कलेक्टर कोरबा को ज्ञापन सौंपकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और शासकीय भूमि की सुरक्षा की मांग की है।
अब पूरे मामले में निगाहें एसडीएम पोड़ी- उपरोड़ा और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या तहसीलदार की जांच रिपोर्ट के आधार पर शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी? क्या 70 वर्ष पुरानी सार्वजनिक धरोहर को न्याय मिलेगा और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध राजस्व एवं अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी?
यदि प्रशासन जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करता है, तो यह मामला शासकीय संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।
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नोट: यह समाचार तहसीलदार पसान द्वारा रिपोर्ट पर आधारित है। अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जाने वाली वैधानिक कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।










