रायपुर // सरकारी स्कूलों में स्कूल प्रबंधन एवं विकास समिति (एसएमडीसी) की जगह अब केवल स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) गठित की जाएगी। समिति का गठन स्कूल खुलने के एक माह के भीतर करना अनिवार्य है। समिति की संरचना में किए गए बदलाव में महत्वपूर्ण यह है कि अब समिति में 75 फीसदी सदस्य बच्चों के पालक होंगे। इतना ही नहीं समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष भी उन्हीं में से बनाए जाएंगे।
स्कूल खुलने के एक माह के भीतर गठित करनी होगी समिति,
भारत सरकार के निर्देश के अनुसार राज्य के स्कूलों में भी स्कूल प्रबंधन समिति गठन करने के संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग ने गाइडलाइन जारी कर दी है। नई व्यवस्था के अनुसार स्कूलों की व्यवस्थाएं देखने की जिम्मेदारी उन पालकों पर होगी, जिनके बच्चे स्कूल में
पढ़ते हैं। अब तक पंचायत से लेकर नगरीय निकाय तक के जनप्रतिनिधि स्कूल प्रबंधन समिति के मुखिया हुआ करते थे। गाइड लाइन के अनुसार समिति में 75 फीसदी पालक होंगे।
शेष 25 फीसदी सदस्य निर्वाचित सदस्य, शिक्षक, शिक्षाविद व अन्य प्रतिनिधि होंगे। समिति का गठन स्कूल खुलने के एक माह के भीतर करना अनिवार्य है। समिति में कुल सदस्य संख्या का 50 प्रतिशत महिला सदस्य होना अनिवार्य है। गठन के पश्चात समिति की पहली बैठक एक सप्ताह के भीतर करनी होगी। पहली बैठक में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा। दोनों पदाधिकारी पालक ही होंगे। हर माह समिति की कम से कम एक बैठक होगी। समिति का कार्यकाल दो साल का होगा।
किसी भी सदस्य को एक और कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्त किया जा सकता है लेकिन एक सदस्य लगातार दो कार्यकाल से अधिक कार्य नहीं कर सकता, सिवाय सदस्य सचिव के। वहीं एक लाख रुपए तक लागत वाले सभी निर्माण एवं मरम्मत कार्य अन्य एजेंसी के अलावा समिति द्वारा कराए जाएंगे।
इस तरह होंगे समिति में सदस्य
अधिकतम 100 छात्र 12-15 सदस्य
100-500 छात्र 15-20 सदस्य
500 से अधिक छात्र- 20-25 सदस्य
समिति की भूमिका यह होगी
सभी बच्चों का नामांकन, नियमित उपस्थिति और समावेशी शिक्षण अवसर सुनिश्चित करना।
ड्रॉपआउट और विद्यालय से बाहर बच्चों को मुख्य धारा में लाने के लिए नामांकन अभियान।
अभिभावक शिक्षक बैठक में सहयोग।
शैक्षणिक योजना एवं समर्थन।
आधारभूत साक्षरता एवं संख्या ज्ञान लक्ष्यों की प्राप्ति में सहयोग।
प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना में सहयोग।
स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण एवं कल्याण सुनिश्चित करना।
स्कूल में 3 वर्षीय विकास योजना तैयार करेगी समिति।
स्कूल अनुदान राशि से शौचालय निर्माण व दुरूस्त तथा बिजली, पंखा व अन्य सुविधाएं मुहैया कराना।
पालक दूर करेंगे स्कूलों की समस्याएंः शिक्षा मंत्री
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि स्कूल की कमान पालकों के हाथों में होने से वे तय करेंगे कि वहां सुविधाएं कैसी हो। स्कूल की समस्याओं का निराकरण भी करेंगे। जिन पालकों के बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं, उन्हें स्कूल के बारे में ज्यादा जानकारी होती है। शासन की ओर से स्कूलों में बजट भी आबंटित किया जाता है। इसका उपयोग समिति बच्चों के हित और स्कूल के विकास में करेंगे। मंत्री ने कहा कि विभाग का पूरा फोकस शिक्षा गुणवत्ता पर है। इस दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं।
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