रायपुर // छत्तीसगढ़ के सभी सरकारी स्कूलों में अब तक काम कर रही शाला विकास समितियां (एसएमडीसी) भंग कर दी गई है। उनकी जगह अब नई स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) गठित की जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष किसी राजनीतिक हस्तक्षेप या बाहरी नियुक्ति से तय नहीं होंगे, बल्कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों में से चुने जाएंगे।
पिछले वर्ष तक स्कूलों की शाला विकास समिति के अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति सीधे तौर पर राजनीतिक होती थी। आमतौर पर स्थानीय विधायक या प्रभारी मंत्री अपनी पसंद के अनुसार अध्यक्ष-उपाध्यक्ष नियुक्त करते थे। नए सिस्टम में नेताओं का हस्तक्षेप पूरी तरह से खत्म हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा जारी एसएमसी-2026 गाइडलाइन के अनुरूप राज्य में यह बदलाव किया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिक से लेकर कक्षा 12वीं तक के सभी सरकारी स्कूलों में नई समिति का गठन शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक महीने के भीतर करना अनिवार्य होगा। नई व्यवस्था में समिति की कुल सदस्य संख्या स्कूल में दर्ज बच्चों की संख्या के आधार पर तय होगी। 100 तक विद्यार्थियों वाले स्कूलों में 12 से 15 सदस्य, 100 से 500 विद्यार्थियों वाले स्कूलों में 15 से 20 सदस्य तथा 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूलों में 20 से 25 सदस्य होंगे।
ये होंगे समिति के अन्य 25 फीसदी सदस्य
नई एसएमसी में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पद अभिभावकों के पास रहेंगे। स्थानीय निकाय का एक निर्वाचित प्रतिनिधि, एक शिक्षक, स्थानीय शिक्षाविद् या विषय विशेषज्ञ, पूर्व विद्यार्थी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता अथवा एएनएम को सदस्य बनाया जाएगा। स्कूल के प्राचार्य या प्रभारी प्राचार्य समिति के सदस्य सचिव होंगे।
ये प्रमुख अधिकार और जिम्मेदारियां
हर महीने कम से कम एक बैठक आयोजित करना अनिवार्य।
विद्यालय में बच्चों के नियमित नामांकन और उपस्थिति सुनिश्चित करना। स्कूल छोड़ चुके बच्चों की पहचान कर उन्हें वापस मुख्यधारा में लाने का प्रयास।
स्कूल में विद्यार्थियों की
संख्या बढ़ाने के लिए नामांकन अभियान चलाना।
अभिभावक-शिक्षक बैठक
(पीटीएम) में सहयोग करना। एफएलएन लक्ष्यों की प्राप्ति में सहयोग देना।
पीएम पोषण (मिड-डे मील) और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों की निगरानी।
स्कूल विकास योजना (एसडीपी) तैयार करने में भागीदारी।
बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और कल्याण सुनिश्चित करना।
स्कूल अनुदान राशि के
उपयोग की निगरानी करना।
अब 1 लाख तक के मरम्मत कार्य का फैसला खुद करेगी समिति
नई एसएमसी को वित्तीय अधिकार भी दिए गए हैं। स्कूलों में 1 लाख रुपए तक के निर्माण और मरम्मत कार्य समिति स्वयं करा सकेगी। इसके लिए अलग से विभागीय मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इन कार्यों में शौचालय निर्माण या मरम्मत, पेयजल व्यवस्था, रैंप, बिजली व्यवस्था, छोटी मरम्मत और अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़े काम शामिल हैं। कार्य निर्धारित प्रक्रिया के तहत कराए जाएंगे तथा तकनीकी मूल्यांकन और भुगतान की व्यवस्था भी तय की गई है। 1 लाख रुपए से अधिक लागत वाले निर्माण और मरम्मत कार्यों के लिए वर्तमान व्यवस्था यथावत रहेगी।










