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पसान अस्पताल की एम्बुलेंस महीनों से खड़ी, फंड पर सवाल; मरीजों की सुविधा या सिर्फ दिखावा?

कोरबा/पसान ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कोरबा लोकसभा सांसद ज्योत्सना चरण दास महंत द्वारा पसान अस्पताल को उपलब्ध कराई गई एम्बुलेंस इन दिनों स्वास्थ्य परिसर में खड़ी नजर आ रही है। कई महीनों से एम्बुलेंस के उपयोग में नहीं आने को लेकर अब स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ग्रामीण मरीजों के लिए एम्बुलेंस जैसी जरूरी सुविधा उपलब्ध है, तो उसका संचालन क्यों नहीं हो पा रहा है?

पसान अस्पताल में महीनों से खड़ी एम्बुलेंस
पसान अस्पताल में महीनों से खड़ी एम्बुलेंस

महीनों से परिसर में खड़ी है एम्बुलेंस

पसान क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए एम्बुलेंस की सुविधा किसी बड़ी राहत से कम नहीं थी। खासकर बरसात के मौसम में जब गांवों से अस्पताल तक मरीजों को पहुंचाना मुश्किल हो जाता है, तब एम्बुलेंस की आवश्यकता और बढ़ जाती है। लेकिन तस्वीर इसके उलट नजर आ रही है।
एम्बुलेंस स्वास्थ्य परिसर में खड़ी है और लंबे समय से इसके संचालन को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आ रही है। ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि सरकारी संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद इसका लाभ मरीजों को क्यों नहीं मिल रहा है?

पसान अस्पताल में महीनों से खड़ी एम्बुलेंस
पसान अस्पताल में महीनों से खड़ी एम्बुलेंस

चालक के मानदेय को लेकर भी उठे सवाल

सूत्रों के मुताबिक, एम्बुलेंस के चालक का मानदेय नहीं मिलने के कारण फिलहाल चालक उपलब्ध नहीं है। हालांकि इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की ओर से आधिकारिक स्थिति स्पष्ट किया जाना बाकी है।
यदि चालक की व्यवस्था केवल मानदेय के अभाव में प्रभावित है, तो सवाल उठता है कि स्वास्थ्य विभाग ने समय रहते इसका समाधान क्यों नहीं किया? ग्रामीण क्षेत्र में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा के लिए उपलब्ध वाहन का यूं खड़ा रहना व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है।

CMHO साहब, क्या एम्बुलेंस चलाने के लिए फंड नहीं है?

कोरबा जिला प्रदेश के प्रमुख राजस्व देने वाले जिलों में शामिल है। ऐसे में ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधा के लिए उपलब्ध एम्बुलेंस के संचालन में फंड की कमी की बात सामने आती है तो यह गंभीर सवाल है।
यदि सामान्य स्वास्थ्य मद से संचालन संभव नहीं है, तो क्या DMF जैसे उपलब्ध संसाधनों से ग्रामीण क्षेत्र की इस जरूरी स्वास्थ्य सुविधा को संचालित करने की व्यवस्था नहीं की जा सकती?

ग्रामीणों का कहना है कि एम्बुलेंस खरीदना या उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है। उसका नियमित संचालन और जरूरत के समय मरीजों तक पहुंचना ही असली सुविधा है।

बरसात में सबसे ज्यादा जरूरत, फिर भी खड़ी है एम्बुलेंस

बरसात के मौसम में ग्रामीण इलाकों में सड़क और परिवहन की स्थिति कई जगह चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ऐसे समय गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, दुर्घटना के मरीजों और गंभीर बीमार लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

ऐसे में सवाल सिर्फ एक वाहन के खड़े रहने का नहीं, बल्कि ग्रामीण मरीजों की जिंदगी से जुड़ी आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा का है।

अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और पसान अस्पताल की एम्बुलेंस को नियमित रूप से संचालित करने के लिए क्या व्यवस्था की जाती है।

स्वास्थ्य विभाग से सीधे सवाल

एम्बुलेंस पिछले कितने समय से खड़ी है?

वर्तमान में इसका चालक कौन है?

एम्बुलेंस के संचालन के लिए बजट/फंड की क्या व्यवस्था है?

क्या DMF या अन्य मद से इसके संचालन की व्यवस्था की जा सकती है?

ग्रामीण मरीजों को इस एम्बुलेंस की सुविधा कब से नियमित रूप से मिल पाएगी?

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Author: CG City News

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