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सरकारी दुकानों का मसाला मुद्दा गरम जांच की घोषणा के बाद हडबड़ाए अफसर और राशन दुकानदार नागरिक आपूर्ति निगम नहीं कर रहा सप्लाई, फिर राशन दुकानों में कौन दे रहा?

Bilaspur // सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों में मसाला बिक्री का मामला विधानसभा तक पहुंचने के बाद फिर सुर्खियों में है। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने सवाल उठाया कि जब नागरिक आपूर्ति निगम ने मसालों की आपूर्ति नहीं की और कोई निविदा प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई, तो दुकानों में यह सामान किस अधिकार से बेचा जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह द्वारा जांच के निर्देश दिए जाने के बाद विभागीय अधिकारियों और राशन दुकान संचालकों में हड़कंप मच गया है।

पीडीएस की राशन दुकानों में मसाला बिक्री का विवाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। विधानसभा में मामला उठने के बाद जिले सहित प्रदेशभर में इस व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल, पीडीएस व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए शासन ने बायोमेट्रिक वितरण प्रणाली लागू की थी। इसके बाद कई राशन दुकान संचालकों ने कम कमीशन और बढ़ते संचालन खर्च का हवाला देते हुए आर्थिक नुकसान की बात कही। इस पर शासन ने वर्ष 2022 में खाद्य विभाग के माध्यम से दुकानों को कार्डधारकों की सहमति से गैर-पीडीएस सामग्री बेचने की अनुमति दी थी, ताकि उनकी आय का अतिरिक्त स्रोत बन सके

विवाद तब गहरा गया जब बेलतरा विधायक ने विधानसभा में सवाल उठाया और खाद्य मंत्री से इसके जवाब मांगे। मसाले को लेकर सदन में एक दूसरे पर चुटकियां भी ली गई। अंततः इस मामले को आसंदी पर बैठे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने मामले को गंभीर मानते हुए इसको संज्ञान में लिया। इसके बाद खाद्य विभाग और राशन दुकान संचालकों में हलचल बढ़ गई है। विभाग का कहना है कि शासन की अनुमति के तहत केवल उपभोक्ताओं की इच्छा से गैर-पीडीएस सामग्री बेची जा सकती है, जबकि किसी विशेष कंपनी या उत्पाद की अनिवार्यता नहीं है। इधर, बिलासपुर के तिफरा क्षेत्र में कार्डधारकों को कथित रूप से जबरन मसाला देने की शिकायत ने विवाद को और हवा दे दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि नागरिक आपूर्ति निगम ने मसालों की आपूर्ति नहीं की, तो राशन दुकानों में बिक रहा यह सामान आखिर किस माध्यम से पहुंचा। यह किसी एक नहीं पूरे प्रदेश भर के दुकानों में बेची जा रही है इस पर किसी बड़े अफसर की मिली भगत होने की भी चर्चा है।

 

मैंने तो इस संबंध में खाद्य मंत्री से पूछा कि क्या पीडीएस की दुकानों में मसाले बेचे जा रहे हैं उस पर उन्होंने अस्वीकार किया, यदि बेचा जा रहा है तो यह सवाल लाजमी है कि क्या मसालों की बिक्री के लिए नागरिक आपूर्ति निगम ने कोई निविदा जारी की थी। यदि नहीं, तो दुकानों तक यह सामग्री कैसे पहुंची और उसकी गुणवत्ता खराब होने या उपभोक्ताओं को नुकसान होने की स्थिति में जवाबदेही किसकी होगी

सुशांत शुक्ला, बेलतरा विधायक

 

पहले कभी दुकानदारों ने घाटे का हवाला दिया था। वर्ष 2022 में खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम ने गैर-पीडीएस सामाग्री बेचने अनुमति प्रदान की गई थी। लेकिन इसे खरीदने के लिए किसी भी हितग्राही को बाध्य नहीं किया जा सकता।

अमृत कुजूर, खाद्य नियंत्रक

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Author: CG City News

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