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जून में रूठा मानसून! छत्तीसगढ़ में 69% कम बारिश, सूखे जैसे हालात से किसान परेशान

रायपुर छत्तीसगढ़ में मानसून की दस्तक के बाद जिस झमाझम बारिश का इंतजार था, वह अब तक पूरा नहीं हो सका है। जून का महीना खत्म होने की ओर है, लेकिन प्रदेश में बारिश सामान्य से काफी कम दर्ज की गई है। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बनने से किसान चिंतित हैं, वहीं दिन में उमस और गर्मी ने लोगों की परेशानी भी बढ़ा दी है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले कुछ दिनों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है, लेकिन फिलहाल प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश का इंतजार जारी है।

सामान्य से 69 फीसदी कम बारिश, चिंताजनक बने हालात

मौसम विभाग के मुताबिक जून महीने में अब तक छत्तीसगढ़ में करीब 51 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक औसतन 161 मिलीमीटर वर्षा हो जानी चाहिए थी। यानी प्रदेश में सामान्य से करीब 69 प्रतिशत कम बारिश हुई है। मानसून पहुंचने के बावजूद बारिश का यह अंतर मौसम वैज्ञानिकों के साथ-साथ कृषि क्षेत्र के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। बारिश की कमी का असर सबसे पहले खेती पर दिखाई देता है। प्रदेश के कई हिस्सों में किसान धान की बुआई शुरू करने के लिए अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। पर्याप्त पानी नहीं मिलने से कई स्थानों पर खेतों की तैयारी होने के बावजूद बुआई की रफ्तार धीमी बनी हुई है

राजधानी रायपुर में भी सूखा रहा जून

राजधानी रायपुर में भी इस बार जून ने बारिश के मामले में निराश किया है। जिले में अब तक केवल 35.8 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जबकि सामान्य तौर पर जून के अंत तक लगभग 136 मिलीमीटर बारिश हो जाती है। यदि पिछले दस वर्षों के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो वर्ष 2026 का जून सबसे कमजोर साबित हुआ है। इससे पहले वर्ष 2022 में जून के दौरान 46 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी, लेकिन इस बार यह आंकड़ा उससे भी नीचे पहुंच गया। वहीं वर्ष 2020 और 2021 में जून के महीने में 250 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई थी। इन आंकड़ों से साफ है कि इस बार मानसून की शुरुआत अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही।

समय पर पहुंचा मानसून, लेकिन नहीं बना मजबूत बारिश का सिस्टम

छत्तीसगढ़ में मानसून ने 22 जून को प्रवेश किया था, जबकि अगले दिन 23 जून को राजधानी रायपुर तक पहुंच गया। मानसून के आने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि प्रदेशभर में लगातार बारिश का दौर शुरू होगा, लेकिन मौसम की परिस्थितियां इसके अनुकूल नहीं बन सकीं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में अब तक कोई प्रभावी कम दबाव का क्षेत्र विकसित नहीं हुआ है। इसी कारण प्रदेश में व्यापक और लगातार बारिश कराने वाला मजबूत सिस्टम सक्रिय नहीं हो पाया। नतीजतन कई जिलों में बादल तो छा रहे हैं, लेकिन अच्छी बारिश नहीं हो रही।

धान की खेती पर पड़ सकता है असर

छत्तीसगढ़ को देश का ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है। यहां लाखों किसान खरीफ सीजन की खेती के लिए मानसून पर निर्भर रहते हैं। जून के अंतिम सप्ताह तक सामान्य स्थिति में कई इलाकों में धान की बुआई शुरू हो जाती है, लेकिन इस बार बारिश कम होने से खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई है।कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो बुआई का समय प्रभावित हो सकता है। हालांकि कई किसान पहली तेज बारिश के इंतजार में अपने खेत तैयार रखे हुए हैं ताकि बारिश मिलते ही खेती का काम तेज किया जा सके।

कुछ जिलों में जरूर बरसे बादल

प्रदेशभर में बारिश की कमी के बीच पिछले 24 घंटे के दौरान कुछ इलाकों में राहत की बारिश दर्ज की गई। मुंगेली में करीब 5 सेंटीमीटर और दरभा में 4 सेंटीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। वहीं गुंडरदेही, अर्जुंदा और कोंटा में लगभग 3-3 सेंटीमीटर बारिश हुई।इसके अलावा रायगढ़, अकलतरा, प्रेमनगर, दुर्ग, भिलाई और आसपास के कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। हालांकि यह बारिश पूरे प्रदेश में बनी वर्षा की कमी को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।

उमस ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें

बारिश कम होने से दिन के समय तेज धूप और उमस का असर लगातार महसूस किया जा रहा है। कई शहरों में दोपहर के समय बाहर निकलना लोगों के लिए मुश्किल साबित हो रहा है। तापमान में अपेक्षित गिरावट नहीं आने से गर्मी का असर भी बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी बारिश होने के बाद ही लोगों को उमस से राहत मिलने की संभावना है।

आज कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विभाग के अनुसार रविवार को प्रदेश में दिनभर गर्मी और उमस बनी रह सकती है। हालांकि दोपहर बाद या शाम के समय मौसम करवट ले सकता है। कई इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है। प्रदेश में अधिकतम तापमान 36 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान 28 से 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। दक्षिण-पश्चिम दिशा से करीब 9 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है।

अगले कुछ दिन अहम

मौसम विभाग का मानना है कि आने वाले दिनों में मानसूनी गतिविधियां धीरे-धीरे मजबूत हो सकती हैं। यदि बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र विकसित होता है तो प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है। फिलहाल किसानों से लेकर आम लोगों तक सभी की नजरें आसमान पर टिकी हैं और उम्मीद है कि जुलाई की शुरुआत के साथ मानसून अपनी रफ्तार पकड़ लेगा।

 

 

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Author: CG City News

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