कोरबा। जिला पंचायत कार्यालय के सामने भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह और सदस्यों के धरने पर बैठने के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। पूर्व राजस्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल ने इस मुद्दे को लेकर श्रम एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन और प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है।
पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल ने बयान जारी करते हुए कहा कि भाजपा के अपने ही जनप्रतिनिधि अधिकारियों की कथित कमीशनखोरी से परेशान होकर धरने पर बैठने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति प्रदेश सरकार के सुशासन के दावों की पोल खोलती है।
भाजपा नेताओं के धरने से बढ़ी सियासी हलचल
जय सिंह अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश में सुशासन तिहार के नाम पर शिविर लगाए जा रहे हैं, लेकिन कोरबा में सत्ता पक्ष के नेताओं और जनप्रतिनिधियों के काम तक नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्य जैसे जनप्रतिनिधियों को अधिकारियों से मिलने के लिए धरना देना पड़ रहा है, तो आम जनता की समस्याओं की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्यों ने खुले तौर पर अधिकारियों पर कमीशनखोरी के आरोप लगाए हैं। ऐसे में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
मंत्री लखनलाल देवांगन पर लगाए गंभीर आरोप
पूर्व मंत्री अग्रवाल ने दावा किया कि धरने की सूचना मिलने पर मंत्री लखनलाल देवांगन मौके पर पहुंचे और नाराज नेताओं को मनाने का प्रयास किया, लेकिन मामला शांत नहीं हो सका। इससे यह स्पष्ट होता है कि भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों को खुली छूट मिलने के कारण भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी चरम पर पहुंच गई है। जिले में रेत, डीजल, कबाड़ और कोयला चोरी जैसी अवैध गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं और इन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।
भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी पर उठे सवाल
जय सिंह अग्रवाल ने कहा कि कोरबा जिले में विकास कार्यों के बजाय भ्रष्टाचार और मनमानी हावी है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और आम जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जब सत्ता पक्ष के नेता ही अपने कार्यों के लिए धरने पर बैठने को मजबूर हों, तब आम जनता को न्याय और राहत मिलना मुश्किल दिखाई देता है।
कोरबा की राजनीति में यह मामला अब चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। जिला पंचायत कार्यालय के सामने हुए धरने के बाद प्रशासनिक कार्यशैली और अधिकारियों की जवाबदेही पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस विवाद का असर आने वाले समय में जिले की राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है।
प्रदेश में सुशासन और पारदर्शिता को लेकर लगातार दावे किए जा रहे हैं, लेकिन भाजपा समर्थित जनप्रतिनिधियों के विरोध प्रदर्शन ने कई नई बहसों को जन्म दे दिया है। अब सभी की नजर प्रशासन और सरकार की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।





