कोरबा/पसान। कटघोरा वन मंडल के पसान क्षेत्र में 52 हाथियों के दल की मौजूदगी से ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ गई है। हाथियों का खौफ अब बच्चों की पढ़ाई और ग्रामीणों की दिनचर्या पर भी भारी पड़ने लगा है।सूत्र बताते है की बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए दीपक स्कूल तेलियामार ( मिशन स्कूल )स्कूल प्रबंधन ने हॉस्टल में रह रहे बच्चों की छुट्टी कर उन्हें घर भेज दिया है। वहीं, ग्रामीण हाथियों से बचने के लिए तरह-तरह के जतन कर रहे हैं। कोई अपने घर की छानी में चारपाई डालकर सोने को मजबूर है, तो कोई खेत और घर बचाने के लिए रातभर जागकर पहरा दे रहा है।

52 हाथियों के दल से दहशत, बच्चों को घर भेजने का फैसला
पसान क्षेत्र में हाथियों की लगातार आवाजाही ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। स्थिति यह है कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मिशन स्कूल प्रबंधन ने हॉस्टल में रहने वाले बच्चों को छुट्टी देकर उनके घर भेज दिया। यह कदम क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी से पैदा हुई चिंता को दर्शाता है। अब ग्रामीणों के सामने अपने परिवार, घर और खेतों की सुरक्षा की बड़ी चुनौती है।
हाथियों के डर से छानी में डाल दी चारपाई!
हाथियों की दहशत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक ग्रामीण ने अपनी चारपाई घर की छानी में डाल दी है। हाथियों की आवाजाही के बीच ग्रामीण सुरक्षित जगह पर रात गुजारने के लिए मजबूर हैं। खेतों में खड़ी धान की फसल और घरों को नुकसान से बचाने के लिए लोग अपनी ओर से अलग-अलग उपाय कर रहे हैं।

शाम ढलते ही हाथियों की चिंता बढ़ जाती है। ग्रामीणों को डर है कि कहीं हाथियों का दल उनके घरों या खेतों की ओर न पहुंच जाए। ऐसे में रातजगा करना उनकी मजबूरी बन गया है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने थाने में लगाई गुहार
हाथियों से सुरक्षा और वन विभाग सहित संबंधित अमले से सहयोग की मांग को लेकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने थाने में बैठक की। बैठक में हाथी प्रभावित क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संकट की इस घड़ी में सहयोग देने की अपील की गई।

थाना प्रभारी ने खुद संभाला मोर्चा
बैठक के बाद थाना प्रभारी स्वयं सक्रिय नजर आए। उन्होंने हाथी प्रभावित क्षेत्र में लोगों को सुरक्षित रहने की समझाइश दी और हाथियों से दूरी बनाए रखने की अपील की। पुलिस की इस सक्रियता से लोगों को सुरक्षा संबंधी जरूरी सावधानियों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।

हालांकि, हाथियों से प्रभावित ग्रामीणों को स्थायी राहत दिलाने के लिए वन विभाग की सतत निगरानी और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी है।
सवाल: हाथियों के बीच कब तक डरकर जिएंगे ग्रामीण?
52 हाथियों के दल की मौजूदगी ने पसान क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। बच्चों को हॉस्टल से घर भेजना, ग्रामीणों का रातभर जागना और सुरक्षित जगह तलाशकर सोना बताता है कि हाथियों की आवाजाही ने सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया है।

अब ग्रामीणों की उम्मीद वन विभाग से है कि हाथियों की निगरानी बढ़ाई जाए, प्रभावित गांवों में समय पर सूचना और सुरक्षा सहायता मिले तथा फसल और मकान के नुकसान पर नियमानुसार राहत उपलब्ध कराई जाए।
पसान में सवाल सिर्फ हाथियों की आवाजाही का नहीं, बल्कि बच्चों, परिवारों और किसानों की सुरक्षा का है। ग्रामीणों को ऐसी व्यवस्था चाहिए, जिसमें उन्हें हर शाम डर के साये में रात गुजारने के लिए मजबूर न होना पड़े।
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