पसान/कोरबा। कोरबा जिले के कटघोरा वन मंडल के पसान वन परिक्षेत्र में 50 से ज्यादा हाथियों की मौजूदगी ने ग्रामीणों और किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शाम ढलते ही गांवों में हाथियों की दहशत बढ़ जाती है। अपनी जान, घर और खेतों में खड़ी धान की फसल बचाने के लिए ग्रामीण मशाल जलाकर रातजगा करने को मजबूर हैं।

शाम होते ही शुरू हो जाती है हाथियों की निगरानी
ग्रामीणों के मुताबिक हाथियों के झुंड खेतों और रिहायशी इलाकों के आसपास पहुंच रहे हैं। हाथियों के डर से ग्रामीण शाम होते ही समूह बनाकर घरों और खेतों की निगरानी कर रहे हैं। कई जगहों पर लोग मशाल जलाकर और जागकर हाथियों को आबादी से दूर रखने का प्रयास कर रहे हैं।

धान की फसल को भारी नुकसान
हाथियों के खेतों में पहुंचने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। हाथियों के झुंड खेतों में घुसकर धान की खड़ी फसल को रौंद रहे हैं और फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसानों का कहना है कि महीनों की मेहनत से तैयार हुई फसल कुछ ही समय में हाथियों के कारण बर्बाद हो रही है।
अपनी समस्या लेकर रेंजर से मिले ग्रामीण
हाथी प्रभावित ग्रामीण अपनी समस्याओं को लेकर सामाजिक कार्यकर्त्ता यूसुफ़ खान, जनप्रतिनिधि और ग्राम पंचायत के पंच के नेतृत्व मे पसान वन परिक्षेत्र कार्यालय पहुंचे और रेंजरमनीष सिंह से मुलाकात कर अपनी परेशानी बताई। ग्रामीणों ने हाथियों से सुरक्षा के लिए प्रभावी इंतजाम करने के साथ ही फसल नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग रखी।

ग्रामीण बोले- नुकसान के मुकाबले मुआवजा बेहद कम
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों से होने वाले वास्तविक नुकसान की तुलना में मिलने वाला मुआवजा काफी कम है। किसानों के सामने एक ओर फसल बचाने की चुनौती है तो दूसरी ओर हाथियों के कारण नुकसान होने पर राहत राशि पर्याप्त नहीं होने की चिंता बनी हुई है।
रातजगा करने को मजबूर ग्रामीण
लगातार हाथियों की आवाजाही के कारण ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ गई है। शाम होते ही लोग घरों और खेतों की रखवाली के लिए निकल पड़ते हैं। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग हाथियों की लगातार निगरानी करे, प्रभावित गांवों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए और फसल नुकसान का उचित आकलन कर राहत राशि उपलब्ध कराए।
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