Cgcitynews ब्यूरो: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनावों से ठीक पहले कैंपस में बढ़ती हिंसा और अराजकता को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा है कि ‘अब बहुत हो चुका है’। कोर्ट ने कैंपस में संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और चुनावी प्रक्रिया के दौरान गुंडागर्दी पर गहरी नाराजगी जताई है।

कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
न्यायमूर्ति की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि शैक्षणिक संस्थानों को राजनीतिक अखाड़ा नहीं बनने दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को विरूपित करना और छात्रों के बीच डर का माहौल पैदा करना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पूछा है कि जब चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं हुई थी, तब कैंपस में इतनी बड़ी संख्या में पोस्टर और बैनर कैसे लग गए?
कानून का शासन सर्वोपरि है। विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि कैंपस में शांति बनी रहे। जो भी छात्र या बाहरी तत्व सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रमुख बिंदु
- दिल्ली हाईकोर्ट ने डीयू प्रशासन और पुलिस को तत्काल प्रभाव से कैंपस की दीवारों को साफ करने का निर्देश दिया है।
- अदालत ने पूछा कि डीयू के नियमों का उल्लंघन करने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
- पुलिस को निर्देश दिया गया है कि कैंपस के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जाए और उपद्रवी तत्वों पर नजर रखी जाए।
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान स्वीकार्य नहीं है।
आगे की राह
हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि आगामी चुनावों के दौरान ‘लिंगदोह समिति’ की सिफारिशों का अक्षरशः पालन हो। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तक प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली पुलिस चुनावी माहौल को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाती है।
Author: CG City News





















