वेब स्टोरी

ई-पेपर

लॉग इन करें

चाइल्ड एब्यूज कंटेंट पर मेटा की बढ़ी मुश्किलें, सरकार ने ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा पर उठाए सवाल

चाइल्ड एब्यूज कंटेंट पर मेटा की बढ़ी मुश्किलें, सरकार ने 'सेफ हार्बर' सुरक्षा पर उठाए सवाल

Cgcitynews ब्यूरो: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा पर चाइल्ड एब्यूज (बाल यौन शोषण) से जुड़ी सामग्री को लेकर सरकार का रुख बेहद सख्त हो गया है। मेटा द्वारा अपनी खामियों को स्वीकार किए जाने के बाद, अब केंद्र सरकार ने कंपनी के ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) स्टेटस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला तब तूल पकड़ा जब प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री को रोकने में मेटा की विफलता सामने आई।

सेफ हार्बर सुरक्षा पर संकट

आईटी नियमों के तहत अब तक मेटा को ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा प्राप्त थी, जिसके तहत प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ताओं द्वारा डाली गई सामग्री के लिए कंपनी को कानूनी रूप से सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता था। हालांकि, सरकार और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने स्पष्ट कर दिया है कि यह सुरक्षा कवच बिना शर्त नहीं है। यदि प्लेटफॉर्म सुरक्षा मानकों का पालन करने में विफल रहता है, तो यह विशेषाधिकार छीना जा सकता है।

एनसीपीसीआर का स्पष्ट मानना है कि सेफ हार्बर सुरक्षा कोई स्थायी अधिकार नहीं है, बल्कि यह प्लेटफॉर्म द्वारा जिम्मेदारी निभाने की शर्त पर आधारित है। सुरक्षा में चूक होने पर मेटा को कानूनी परिणामों का सामना करना होगा।

मेटा के लिए नई गाइडलाइंस

सरकार ने मेटा को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) के किसी भी मामले को तुरंत संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट करे। कंपनी को अब अपनी एल्गोरिदम और मॉडरेशन नीतियों में बड़े बदलाव करने होंगे ताकि ऐसी सामग्री को फैलने से रोका जा सके।

प्रमुख बिंदु:

  • मेटा ने अपनी मॉडरेशन प्रणाली में खामियों को स्वीकार किया है।
  • सरकार ने सेफ हार्बर इम्यूनिटी को समीक्षा के दायरे में रखा है।
  • CSAM सामग्री की रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी गई है।
  • प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े तकनीकी मानकों की मांग की गई है।

आने वाले दिनों में मेटा को अपनी जवाबदेही साबित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे, अन्यथा उसे भारत में अपनी कानूनी सुरक्षा खोने का बड़ा जोखिम उठाना पड़ सकता है।

CG City News
Author: CG City News

Leave a Comment

और पढ़ें
और पढ़ें