cgcitynews.in ब्यूरो: फरीदाबाद के बड़खल इलाके में अरावली की संरक्षित पर्वत श्रृंखलाओं पर माफियाओं ने एक बार फिर बड़ा हमला बोला है। वन विभाग और पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए करीब 25 एकड़ वन भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध खनन किए जाने का मामला सामने आया है। मौके पर पत्थरों के बड़े ढेर और खुदाई के गहरे निशान इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यहां लंबे समय से बेखौफ होकर प्राकृतिक संसाधनों को लूटा जा रहा था।

क्या है पूरा मामला?
बड़खल के पहाड़ी क्षेत्रों में फैली इस संरक्षित भूमि पर अवैध रूप से चट्टानों को तोड़ा गया है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की सूचना पर जब स्थिति का जायजा लिया गया, तो वहां का मंजर हैरान करने वाला था। करीब 25 एकड़ के दायरे में जमीन को खोदकर पत्थरों को निकाला गया है, जिससे न केवल अरावली की प्राकृतिक सुंदरता नष्ट हुई है, बल्कि पारिस्थितिक तंत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
अरावली की पहाड़ियां एनसीआर के लिए फेफड़ों का काम करती हैं। यहां होने वाला अवैध खनन न केवल भूजल स्तर को प्रभावित करता है, बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को भी खत्म कर रहा है। इस मामले में सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। – पर्यावरण विशेषज्ञ
खनन माफियाओं के हौसले बुलंद
क्षेत्र में फैली इन पहाड़ियों पर बड़े पैमाने पर पत्थर तोड़ने की मशीनें और भारी वाहनों के निशान देखे गए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की नाक के नीचे इतने बड़े इलाके में अवैध खनन कैसे संभव हुआ? मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- करीब 25 एकड़ संरक्षित वन भूमि को पूरी तरह से खोद दिया गया है।
- मौके पर भारी मात्रा में टूटे हुए पत्थर और मलबे के ढेर देखे गए हैं।
- अवैध खनन के कारण पहाड़ी का भौगोलिक स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है।
- प्रशासनिक लापरवाही के चलते माफियाओं ने इस इलाके को अपना सुरक्षित ठिकाना बना लिया है।
आगे की कार्रवाई
इस मामले के सामने आने के बाद अब वन विभाग के अधिकारी जांच की बात कह रहे हैं। हालांकि, पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि जब तक उच्च स्तरीय जांच नहीं होगी और दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक अरावली को बचाना मुश्किल है। फिलहाल, क्षेत्र में वन सुरक्षा बलों की गश्त बढ़ाने की मांग की जा रही है ताकि आगे की खुदाई को रोका जा सके।
Author: CG City News





















