cgcitynews.in ब्यूरो: बॉलीवुड के गलियारों में अक्सर वही फिल्में चमकती हैं जिन्हें बड़े बैनर का साथ मिलता है, लेकिन ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्मों ने यह साबित कर दिया है कि दर्शकों का प्यार किसी भी मार्केटिंग बजट से बड़ा होता है। फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने हाल ही में इंडस्ट्री के दोहरे रवैये पर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि कैसे शुरुआत में उन्हें स्क्रीन काउंट के लिए संघर्ष करना पड़ा और इंडस्ट्री के तथाकथित जानकारों ने उन्हें हतोत्साहित किया था।

इंडस्ट्री का दोहरा चेहरा और ‘ज्ञान’ की संस्कृति
विशाल चतुर्वेदी ने एक इंटरव्यू के दौरान उन लोगों पर निशाना साधा जो फिल्म के रिलीज होने से पहले इसे नकार रहे थे, लेकिन सफलता के बाद बधाई देने वालों की कतार में सबसे आगे थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बॉलीवुड में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो यह तो नहीं जानते कि दर्शकों को क्या पसंद आएगा, लेकिन वे अपनी राय और ‘ज्ञान’ देने में कभी पीछे नहीं हटते।
फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे लोग भरे पड़े हैं जो खुद को विशेषज्ञ मानते हैं, लेकिन उनमें फिल्म निर्माण के प्रति वह जुनून और समझ नहीं है जो एक कहानी को जमीन से जोड़ सके।
सफलता की कहानी: नीम करोली बाबा की भक्ति
नीम करोली बाबा की भक्ति और आस्था पर आधारित ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर सभी अनुमानों को गलत साबित कर दिया है। फिल्म की सफलता के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- फिल्म ने रिलीज के 25वें दिन तक भारत में 45 करोड़ रुपये से अधिक का नेट कलेक्शन किया है।
- शुरुआती दौर में स्क्रीन की कमी के बावजूद फिल्म ने वर्ड ऑफ माउथ के जरिए दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचा।
- फिल्म की सादगी और आध्यात्मिक जुड़ाव ने इसे एक सरप्राइज हिट बना दिया है।
क्या है आगे की राह?
निर्देशक का मानना है कि ‘हनुमान अंश’ की सफलता ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय दर्शक अब केवल चमक-धमक वाली फिल्मों के पीछे नहीं भाग रहे, बल्कि वे ऐसी कहानियों को देखना चाहते हैं जो उनकी जड़ों और आस्था से जुड़ी हों। चतुर्वेदी का यह बयान बॉलीवुड के उस वर्ग के लिए एक आईना है जो अक्सर जमीनी हकीकत से दूर रहकर फिल्मों का भविष्य तय करने का दावा करते हैं।
Author: CG City News





















