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कर्री उप स्वास्थ्य केंद्र: जांच टीम नहीं बनी तो सवाल और गहरे, क्या ठेकेदार के रसूख के आगे सिस्टम बेबस?

कोरबा/पसान । निर्माणाधीन उप स्वास्थ्य केंद्र की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जांच टीम अब तक क्यों नहीं बन पाई? जब भवन के निर्माण को लेकर तस्वीरें और शिकायतें सामने आ रही हैं, तो जिम्मेदार विभाग की ओर से तकनीकी जांच में देरी आखिर किस बात का संकेत है?
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की जा रही है। पिलर, बीम और अन्य निर्माण कार्यों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में प्रशासन की चुप्पी ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

जांच टीम नहीं बनी तो उठेंगे बड़े सवाल

ग्रामीणों की मांग सीधी है—निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच हो और मौके पर इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता की जांच की जाए। लेकिन यदि शिकायतों के बावजूद जांच टीम का गठन नहीं होता है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर किसे बचाया जा रहा है?
क्या मामला सिर्फ विभागीय लापरवाही है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा दबाव है? क्या ठेकेदार इतना रसूखदार है कि उसके निर्माण कार्य की जांच कराने में भी सिस्टम के हाथ बंधे हुए हैं?
इन सवालों का जवाब अब शासन और संबंधित विभाग को देना होगा।

सरकारी भवन है, किसी की निजी जागीर नहीं

यह कोई निजी मकान नहीं, बल्कि सरकारी धन से बनने वाला उप स्वास्थ्य केंद्र है। यहां आने वाले ग्रामीणों और मरीजों की सुरक्षा सीधे भवन की मजबूती से जुड़ी होगी। यदि निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं तो निर्माण पूरा होने का इंतजार क्यों?
ग्रामीणों की मांग है कि निर्माण एजेंसी से जुड़े अधिकारियों और इंजीनियर की मौजूदगी में नहीं, बल्कि स्वतंत्र तकनीकी टीम से जांच कराई जाए। निर्माण सामग्री के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता की प्रयोगशाला जांच हो और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।


अब शासन की बारी—जांच होगी या मामला दबेगा?

कर्री के ग्रामीण अब शासन और जिला प्रशासन से सवाल कर रहे हैं—क्या शिकायतों पर तत्काल संज्ञान लेकर जांच कराई जाएगी या फिर फाइलों में ही मामला दबा दिया जाएगा?

यदि निर्माण कार्य नियमानुसार हुआ है तो निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आने में किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए। और यदि अनियमितता मिली, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होना जरूरी है।
अब देखना यह है कि शासन ग्रामीणों की आवाज सुनकर जांच का आदेश देता है या फिर “जांच टीम नहीं बन पाई” का बहाना बनाकर मामला यूं ही चलता रहता है।

कर्री के साथ लैगी उप स्वास्थ्य केंद्र भी सवालों के घेरे में, एक ही ठेकेदार के निर्माण पर उठे सवाल; कलेक्टर से शिकायत करेंगे ग्रामीण

कर्री में निर्माणाधीन उप स्वास्थ्य केंद्र की गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल अभी थमे भी नहीं हैं कि अब लैगी में इसी ठेकेदार द्वारा बनाए जा रहे उप स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण कार्य पर भी ग्रामीणों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब एक ही ठेकेदार के निर्माण कार्य को लेकर गुणवत्ता संबंधी सवाल सामने आ रहे हैं, तो दूसरे स्थान पर चल रहे उसके निर्माण की भी तकनीकी जांच जरूरी है।

कर्री के बाद लैगी में भी गुणवत्ता पर सवाल

ग्रामीणों के मुताबिक लैगी में बन रहे उप स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण कार्य में भी गुणवत्ता को लेकर संदेह पैदा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी धन से बनने वाले स्वास्थ्य केंद्र में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कर्री में निर्माण की गुणवत्ता जांच के घेरे में है, तो उसी ठेकेदार द्वारा लैगी में किए जा रहे निर्माण की जांच क्यों न हो?

कलेक्टर से करेंगे शिकायत

मामले को लेकर ग्रामीण अब कोरबा कलेक्टर से शिकायत करने की तैयारी में हैं। ग्रामीणों की मांग है कि कर्री और लैगी दोनों उप स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी टीम से जांच कराई जाए।
ग्रामीण चाहते हैं कि निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता, पिलर-बीम की मजबूती और स्वीकृत निर्माण मापदंडों की जांच की जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई हो।


क्या एक ठेकेदार के दो निर्माणों की होगी जांच?

अब मामला सिर्फ कर्री तक सीमित नहीं रह गया है। एक ही ठेकेदार द्वारा बनाए जा रहे दो उप स्वास्थ्य केंद्रों को लेकर सवाल उठना प्रशासन के लिए गंभीर विषय है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर निर्माण सही है तो निष्पक्ष जांच से स्थिति साफ हो जाएगी। लेकिन यदि गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो समय रहते सुधार और कार्रवाई जरूरी है।

साहब! अब जांच से पीछे क्यों?

ग्रामीणों का सवाल है कि सरकारी भवनों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना किसकी जिम्मेदारी है? क्या निर्माण पूरा होने के बाद शिकायत का इंतजार किया जाएगा, या निर्माण के दौरान ही तकनीकी जांच कराकर कमियों को दूर कराया जाएगा?

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Author: CG City News

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