कोरबा जिले के अंतिम छोर पसान क्षेत्र में ओवरलोड गिट्टी से लदे भारी वाहन दिनदहाड़े फर्राटे भर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि RTO, वन विभाग के बैरियर और पुलिस थाना पार करने के बावजूद इन वाहनों पर कार्रवाई नहीं हो रही।
कोरबा/पसान। कोरबा जिले के अंतिम छोर पसान क्षेत्र में ओवरलोड गिट्टी परिवहन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र में बड़ी संख्या में गिट्टी से लदे भारी वाहन निर्धारित क्षमता से अधिक भार लेकर मुख्य सड़कों पर दौड़ते दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये वाहन RTO जांच, वन विभाग के बैरियर और पुलिस थाना क्षेत्र से होकर गुजरते हैं, फिर भी इन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती।
सामने आई तस्वीरों में भी भारी वाहन तिरपाल से ढंके हुए दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, केवल तस्वीर के आधार पर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि वाहन नियमों के अनुसार ओवरलोड हैं। यदि ओवरलोडिंग की पुष्टि होती है, तो यह सड़क सुरक्षा और नियमों के पालन दोनों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

लोगों का आरोप है कि यदि सामान्य वाहन चालकों पर नियमों के उल्लंघन पर तुरंत चालानी कार्रवाई होती है, तो फिर भारी खनिज परिवहन करने वाले वाहनों पर समान सख्ती क्यों नहीं दिखाई देती? इस मुद्दे को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
गौरतलब है कि ओवरलोड वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए परिवहन, राजस्व और अन्य विभाग समय-समय पर अभियान चलाते रहे हैं तथा पहले भी कोरबा जिले में ओवरलोड वाहनों पर जुर्माना लगाया जा चुका है।
इस समस्या के मुख्य पहलू:
- सुरक्षा तंत्र पर सवाल: जब क्षेत्र में ‘हाईटेक बैरियर’ और ‘वनोपज जाँच नाका’ जैसे सुरक्षा इंतजाम मौजूद हैं, तो बिना किसी रोक-टोक के इन ओवरलोड वाहनों का गुजरना सीधे तौर पर निगरानी तंत्र की मिलीभगत या लापरवाही की ओर इशारा करता है।क्या पसान का वन बैरियर सिर्फ कोयला लोड गाड़ियों की रजिस्टर मे नजराना लेकर एंट्री करती है, रेत और गिट्टी वाहनों की जांच का आदेश ऊपर से नहीं है अब यह तो पसान रेंजर ही बता सकते है, की उन्होंने कर्मचारियों को क्या निर्देश दिए है
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पसान वन अवरोध बैरियर - सड़कों की बदहाली और हादसे का डर: ओवरलोड गिट्टी और मलबे से लदे ये ट्रक न सिर्फ करोड़ों की लागत से बनी लोक निर्माण विभाग (PWD) और ग्रामीण सड़कों को समय से पहले बर्बाद कर देते हैं, बल्कि आए दिन होने वाले सड़क हादसों का मुख्य कारण भी बनते हैं।
- राजस्व का नुकसान: क्षमता से अधिक माल ले जाने के कारण सरकार को मिलने वाले टैक्स (RTO टैक्स और रॉयल्टी) का भारी नुकसान होता है।
जनता के सवाल
क्या इन वाहनों की नियमित वजन जांच की जा रही है?
यदि वाहन ओवरलोड हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
क्या संबंधित विभाग संयुक्त जांच अभियान चलाएंगे?
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