स्पोर्ट्स डेस्क। भारतीय क्रिकेट गलियारों से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने खेल प्रेमियों के बीच हलचल मचा दी है। बीसीसीआई की चयन समिति ने आगामी विदेशी दौरों के लिए जिस टी20 टीम का ऐलान किया है, उसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। मैदान पर हाल ही में इतिहास रचने वाले एक बड़े चेहरे को कप्तानी के पद से हटा दिया गया है, जो किसी बड़े सियासी उलटफेर से कम नहीं लगता। बोर्ड का यह फैसला इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि जिस खिलाड़ी से कप्तानी छीनी गई है, उसने अपनी लीडरशिप में टीम को सफलता के शिखर पर पहुंचाया था। अब जिम्मेदारी एक ऐसे मध्यक्रम के बल्लेबाज को सौंपी गई है, जिसके कंधों पर भविष्य की बड़ी उम्मीदें टिकी हुई हैं।
एक सुनहरे दौर की विदाई और नए नेतृत्व का आगाज
अगर पिछले कुछ समय के रिकॉर्ड्स पर नजर डालें, तो टीम को विश्व कप का खिताब दिलाने वाले कप्तान को इस तरह अचानक पद से हटाना वाकई चौंकाता है। साल 2024 में जब रोहित शर्मा ने खेल के इस सबसे छोटे प्रारूप को अलविदा कहा था, तब कप्तानी का ताज सूर्यकुमार यादव के सिर सजाया गया था। हार्दिक पंड्या की फिटनेस चिंताओं के बीच सूर्या ने जिम्मेदारी संभाली और टीम को अपनी आक्रामक शैली से आगे बढ़ाया। उन्होंने बतौर कप्तान 52 अंतरराष्ट्रीय मैचों में टीम की कमान संभाली, जिसमें से रिकॉर्ड 42 मैचों में भारत को जीत मिली और सिर्फ 8 मैचों में हार का स्वाद चखना पड़ा। लगभग 81 प्रतिशत का यह शानदार जीत का आंकड़ा भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे बेहतरीन कप्तानी रिकॉर्ड्स में गिना जाएगा, लेकिन इसके बावजूद बोर्ड ने अब श्रेयस अय्यर पर भरोसा जताते हुए उन्हें नया टी20 कप्तान नियुक्त कर दिया है।
आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए सजी नई टीम
भारतीय चयनकर्ताओं ने आगामी आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए जिस टीम का चयन किया है, उसमें दूरगामी सोच साफ दिखाई दे रही है। बोर्ड का पूरा ध्यान अब आने वाले सालों की बड़ी चुनौतियों पर टिक गया है। नए कप्तान श्रेयस अय्यर के सामने सबसे बड़ा मिशन साल 2028 में होने वाले लॉस एंजेलिस ओलंपिक में देश को स्वर्ण पदक दिलाना और उसी साल होने वाले टी20 विश्व कप के लिए एक अजेय टीम तैयार करना है। श्रेयस के लिए यह सफर आसान नहीं होने वाला है, क्योंकि उन्हें सीनियर खिलाड़ियों के अनुभव और युवाओं के जोश के बीच एक ऐसा संतुलन बनाना होगा जो टीम को लगातार जीत की पटरी पर बनाए रखे।
15 साल के इस अजूबे ने रचा इतिहास
इस पूरे घटनाक्रम और बड़े बदलावों के बीच टीम चयन में एक ऐसी ऐतिहासिक एंट्री हुई है जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। क्रिकेट के पंडित इस बात से हैरान हैं कि महज 15 साल की उम्र में एक लड़के ने टीम इंडिया के मुख्य स्क्वॉड में अपनी जगह पक्की कर ली है। वैभव सूर्यवंशी नाम का यह उभरता हुआ सितारा भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे युवा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बनने जा रहा है। इतने बड़े मंच पर इतनी कम उम्र में मौका मिलना यह साफ दर्शाता है कि चयनकर्ता अब पूरी तरह से बदलाव के मूड में हैं और वे नए टैलेंट को तराशने के लिए किसी भी बड़े फैसले से पीछे नहीं हट रहे हैं










