कोरबा/ कोरबी // जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड स्थित कोरबी बस स्टैंड इन दिनों भीषण पेयजल संकट से जूझ रहा है। एक तरफ तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, वहीं दूसरी ओर प्रतिदिन हजारों यात्रियों की आवाजाही वाले इस प्रमुख बस स्टैंड में पीने के पानी की स्थायी व्यवस्था तक नहीं है। इससे यात्रियों और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
जानकारी के अनुसार कुछ वर्ष पहले यात्रियों की सुविधा के लिए बस स्टैंड परिसर में बोर खनन कराया गया था। शुरुआती दिनों में इससे लोगों को काफी राहत मिली, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में मोटर खराब हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक मानसिक रूप से कमजोर घुमंतू व्यक्ति द्वारा रात में मोटर चालू कर दिए जाने से मोटर जल गई और तब से व्यवस्था ठप पड़ी हुई है। दो वर्ष बीत जाने के बावजूद मरम्मत नहीं होने से पूरा परिसर उपेक्षा और अव्यवस्था का प्रतीक बन गया है।
स्थिति इतनी गंभीर है कि जहां पेयजल व्यवस्था विकसित की जानी थी, वह स्थान अब गंदगी और बदहाली का केंद्र बन चुका है। वहीं जिस जगह पानी टंकी स्थापित की जानी थी, उसे भी पहले ही ध्वस्त कर दिया गया। ऐसे में लाखों रुपये की लागत से बनाई गई जनसुविधा का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
जनता के सवाल, प्रशासन के जवाब का इंतजार
स्थानीय नागरिकों और यात्रियों ने प्रशासन के सामने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं—
बोरवेल खराब होने के बाद स्थल को बदहाल और अनुपयोगी क्यों छोड़ दिया गया?
जिस स्थान पर पानी टंकी लगनी थी, उसे पहले ही क्यों ध्वस्त कर दिया गया?
लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई जनहितकारी योजना पर अधिकारियों की नजर क्यों नहीं गई?
क्या कोरबी बस स्टैंड में यात्रियों के लिए स्थायी पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी?

पुलिस की पहल बनी राहत, लेकिन स्थायी समाधान जरूरी
भीषण गर्मी को देखते हुए 18 मई 2026 से कोरबी चौकी प्रभारी सुरेश कुमार जोगी एवं पुलिस स्टाफ रितेश शर्मा ने बस स्टैंड परिसर में मटकों के माध्यम से प्याऊ जल सेवा शुरू की है। इस मानवीय पहल में सरपंच राजूराम मरावी, उपसरपंच मुरारी जायसवाल, रंजीत जायसवाल तथा अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी सहयोग दिया है। इससे यात्रियों को अस्थायी राहत जरूर मिली है, लेकिन स्थायी समाधान की मांग लगातार उठ रही है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता देकर स्थायी पेयजल व्यवस्था बहाल करता है या फिर यह मुद्दा भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। भीषण गर्मी के बीच जनता को अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर कार्रवाई का इंतजार है।










