Cgcitynews ब्यूरो: उम्र महज एक संख्या है, इस कहावत को हरियाणा के एक 85 वर्षीय बुजुर्ग ने सच कर दिखाया है। अपनी उम्र के इस पड़ाव पर जहां लोग अक्सर आराम की जिंदगी चुनते हैं, वहीं इस जांबाज बुजुर्ग ने शिक्षा के प्रति अपनी अटूट लगन का परिचय देते हुए मास्टर्स डिग्री (MA) पूरी की है। उन्होंने न केवल परीक्षा उत्तीर्ण की, बल्कि 965 अंकों के साथ शानदार प्रदर्शन कर युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।

शिक्षा के प्रति अटूट जुनून
इस बुजुर्ग ने साबित कर दिया है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। अपनी शैक्षणिक यात्रा के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि उनके मन में हमेशा से ज्ञान के प्रति एक गहरी प्यास रही है। पारिवारिक जिम्मेदारियों और जीवन के संघर्षों के बीच वे अपनी पढ़ाई को पूरा नहीं कर पाए थे, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपनी अधूरी इच्छा को पूरा करने का संकल्प लिया।
सफलता का सफर
परीक्षा में 965 अंक हासिल करना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। उन्होंने न केवल कठिन विषयों को समझा बल्कि उन्हें अपनी मेहनत और एकाग्रता से आत्मसात भी किया। उनकी इस सफलता ने न केवल उनके परिवार को गौरवान्वित किया है, बल्कि समाज के उन सभी लोगों के लिए एक मिसाल पेश की है जो उम्र का बहाना बनाकर अपने सपनों को छोड़ देते हैं।
शिक्षा का कोई अंत नहीं होता। मैंने यह डिग्री किसी नौकरी के लिए नहीं, बल्कि अपने आत्म-संतुष्टि और ज्ञान के विस्तार के लिए हासिल की है। अब मेरा अगला लक्ष्य पीएचडी या कानून की पढ़ाई करना है।
भविष्य की योजनाएं
अपनी मास्टर्स डिग्री पूरी करने के बाद, अब उनकी नजरें उच्च शिक्षा पर टिकी हैं। वे अब पीएचडी करने या कानून (Law) की डिग्री हासिल करने की योजना बना रहे हैं। उनकी यह इच्छाशक्ति दर्शाती है कि यदि मन में दृढ़ संकल्प हो, तो परिस्थितियां कभी भी बाधा नहीं बनतीं।
प्रमुख बिंदु:
- 85 वर्ष की आयु में मास्टर्स डिग्री की सफलता।
- कुल 965 अंकों के साथ परीक्षा उत्तीर्ण की।
- अगला लक्ष्य पीएचडी या एलएलबी (LLB) में प्रवेश लेना।
- युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का एक बड़ा उदाहरण।
Author: CG City News





















