Cgcitynews ब्यूरो: मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता विजयराघवन ने हाल ही में अपने बचपन के उन दिनों को याद किया है, जब उनके परिवार को समाज की संकीर्ण मानसिकता का सामना करना पड़ा था। उनके पिता और प्रसिद्ध थिएटर हस्ती एन.एन. पिल्लई के अभिनय के प्रति जुनून ने उन्हें समाज की नजरों में एक अलग स्थान पर खड़ा कर दिया था, जिसे उस दौर में सम्मानजनक नहीं माना जाता था।

थिएटर से जुड़ाव और सामाजिक कलंक
विजयराघवन ने बताया कि उस समय अभिनय को एक पेशे के रूप में देखने का नजरिया बेहद नकारात्मक था। उनके परिवार को अक्सर लोगों की उपेक्षा का शिकार होना पड़ता था। उन्होंने याद करते हुए कहा कि कैसे उनके कई रिश्तेदार उनके घर आने से कतराते थे और उनके परिवार से दूरी बना ली थी, सिर्फ इसलिए क्योंकि वे थिएटर और कला की दुनिया से गहराई से जुड़े थे।
पिता के साथ गहरा रिश्ता
इन तमाम सामाजिक चुनौतियों के बावजूद, विजयराघवन का अपने पिता एन.एन. पिल्लई के साथ रिश्ता बेहद आत्मीय और दोस्ताना रहा। उन्होंने बताया कि कैसे उनके पिता ने कभी भी इन बाहरी दबावों को अपने काम और परिवार के बीच नहीं आने दिया।
मेरे पिता ने मुझे सिखाया कि कला के प्रति समर्पण ही सबसे बड़ी शक्ति है। समाज क्या कहता है, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि आप अपने काम के प्रति कितने ईमानदार हैं।
बचपन के अनुभवों का प्रभाव
अभिनेता का मानना है कि उन कठिन परिस्थितियों ने ही उन्हें एक कलाकार के रूप में परिपक्व बनाया। इन अनुभवों ने उन्हें समाज की वास्तविकता और प्रदर्शन कला के महत्व को गहराई से समझने में मदद की।
मुख्य बिंदु:
- विजयराघवन के परिवार को थिएटर में सक्रिय रहने के कारण सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा।
- रिश्तेदारों ने उनके घर से दूरी बना ली थी क्योंकि अभिनय को उस समय निम्न दृष्टि से देखा जाता था।
- एन.एन. पिल्लई और विजयराघवन के बीच का मजबूत बंधन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।
- बचपन के इन अनुभवों ने विजयराघवन के अभिनय करियर की नींव रखी।
Author: CG City News





















