कोरबा/ पसान // जिले के पसान परियोजना अंतर्गत कुम्हारपारा आंगनबाड़ी केंद्र से सामने आई तस्वीरें सरकारी व्यवस्थाओं की हकीकत बयां कर रही हैं। बारिश के मौसम में केंद्र की छत जगह-जगह से टपक रही है, जिससे पूरा फर्श पानी से भीग चुका है। ऐसे हालात में नन्हे बच्चे उसी गीले फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने और समय बिताने को मजबूर हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि आंगनबाड़ी भवन लंबे समय से जर्जर स्थिति में है, लेकिन इसकी मरम्मत के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बरसात शुरू होते ही भवन की छत से लगातार पानी टपकने लगता है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र में आने वाले अधिकांश बच्चे 3 से 6 वर्ष की आयु के हैं। ऐसे में गीले फर्श पर बैठने से सर्दी, बुखार और अन्य संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। वहीं फिसलकर चोट लगने की आशंका भी लगातार बनी हुई है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार इस समस्या की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी गई, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि अधिकारी कार्यालयों में बैठकर योजनाओं की समीक्षा करते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर बच्चों को मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।
बच्चों के अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि कुम्हारपारा आंगनबाड़ी केंद्र का तत्काल निरीक्षण कराया जाए, भवन की मरम्मत कराई जाए अथवा वैकल्पिक सुरक्षित भवन में केंद्र का संचालन सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार बच्चों के पोषण, शिक्षा और सुरक्षित वातावरण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तब आखिर ऐसी बदहाल स्थिति की जिम्मेदारी किसकी है? क्या संबंधित विभाग इस मामले में तत्काल कार्रवाई करेगा या फिर मासूम बच्चे इसी तरह खतरे के बीच पढ़ाई करने को मजबूर रहेंगे?
कार्यकर्ता को अन्य जगह पर आंगनबाडी लगाने को बोला गया है
संतोषी रात्रे
प्रभारी परियोजना अधिकारी पसान

कार्यकर्ता को अन्य जगह पर आंगनबाडी लगाने को बोला गया है लेकिन कार्यकर्त्ता के सामने सब से बड़ी दुविधा यह रहती है की इतनी कम दर मे भवन कहा मिलेगा जिसमे आंगनबाडी संचालित हो सके, और हर माह पैसा नहीं आने के कारण मकान मालिक घर किराया से देने को तैयार नहीं होता
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