कोरबा/पसान। पसान शासकीय उचित मूल्य दुकान की जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के संचालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नायब तहसीलदार जब मौके पर जांच करने पहुंचे तो गंगा महिला स्वसहायता समूह, जिसके नाम पर राशन दुकान संचालित है, उसकी अध्यक्ष, सचिव समेत कोई भी सदस्य मौके पर मौजूद नहीं मिला।
इस स्थिति के बाद क्षेत्र में यह सवाल तेज हो गया है कि क्या समूह ने नियमों के विपरीत राशन दुकान का संचालन किसी निजी विक्रेता को सौंप रखा था?
समूह नहीं, क्या विक्रेता चला रहा था पूरी दुकान?
जांच के दौरान समूह के जिम्मेदार पदाधिकारी अनुपस्थित मिले। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि लंबे समय से राशन दुकान का संचालन वास्तविक रूप से एक विक्रेता कर रहा है, जबकि समूह केवल कागजों में संचालक बना हुआ है।
बारदाना राशि को लेकर भी उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, बारदाना (बोरियों) की राशि पहले गंगा महिला स्वसहायता समूह के खाते में आती है और उसके बाद वह राशि सीधे विक्रेता के खाते में भेजी जाती है। इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और इसकी जांच की आवश्यकता है।
स्टॉक जांच में सामने आई भारी अनियमितता
17 जुलाई 2026 को नायब तहसीलदार धनेश्वर चंद्रा, राजस्व निरीक्षक (RI) एवं पटवारी की संयुक्त टीम ने दुकान का निरीक्षण कर शिकायतकर्ताओं, विक्रेता और हितग्राहियों की मौजूदगी में विस्तृत जांच की।
स्टॉक जांच में सामने आई भारी अनियमितता
जांच के दौरान दुकान में मौजूद भौतिक स्टॉक, ई-पीओएस (PoS) मशीन के ऑनलाइन रिकॉर्ड और स्टॉक पंजी का मिलान किया गया। तीनों रिकॉर्ड में बड़ा अंतर पाया गया।
मौके पर उपलब्ध स्टॉक
चावल – 265.5 क्विंटल
नमक – 16 क्विंटल
शक्कर – 18.5 क्विंटल
चना – 17.5 क्विंटल
PoS मशीन के अनुसार
चावल – 252.53 क्विंटल
नमक – 26.25 क्विंटल
शक्कर – 14.66 क्विंटल
चना – 18.62 क्विंटल
स्टॉक पंजी के अनुसार
चावल – 182 क्विंटल
नमक – 13.80 क्विंटल
शक्कर – 18.20 क्विंटल
चना – 18.56 क्विंटल
जांच में भौतिक स्टॉक और PoS रिकॉर्ड में लगभग 13 क्विंटल चावल का अंतर, जबकि भौतिक स्टॉक और स्टॉक पंजी में लगभग 83 क्विंटल चावल अतिशेष पाया गया। नमक, शक्कर और चना के रिकॉर्ड में भी उल्लेखनीय अंतर दर्ज किया गया।
₹1500 की मांग, ₹1000 देने का बयान
शिकायतकर्ता पवन सेन ने जांच दल के समक्ष बयान दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि राशन कार्ड में नाम जोड़ने के लिए ₹1500 की मांग की गई थी, जिसमें से उसने ₹1000 विक्रेता को दिए। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि इस संबंध में उसके पास बातचीत की रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जिसे जांच का हिस्सा बनाया गया।
फिंगर लगवाकर 20 किलो राशन रोकने का आरोप
एक हितग्राही ने अधिकारियों को बताया कि उसके हिस्से के 70 किलो चावल में केवल 50 किलो ही दिए गए, जबकि PoS मशीन में पूरे 70 किलो वितरण दर्ज कर दिए गए थे। शिकायत की पुष्टि होने पर अधिकारियों की मौजूदगी में 20 किलो चावल हितग्राही को उपलब्ध कराया गया।


पूर्व अध्यक्ष का दावा—विरोध किया तो हटा दिया गया
गंगा महिला स्वसहायता समूह की पूर्व अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि उन्होंने विक्रेता के कथित अनियमित कार्यों का विरोध किया था। उनके अनुसार, इसके बाद उन्हें समूह से हटा दिया गया और उनकी जगह विक्रेता की पत्नी को अध्यक्ष बना दिया गया, ताकि कोई विरोध न कर सके। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच होना बाकी है और संबंधित पक्ष का पक्ष भी लिया जाना चाहिए।

सबसे बड़ा सवाल—विक्रेता की नियुक्ति किसके आदेश से हुई?
अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि राशन दुकान का संचालन वास्तव में किसी विक्रेता द्वारा किया जा रहा था, तो उसकी नियुक्ति किस सक्षम अधिकारी या आदेश के तहत की गई? यदि ऐसी नियुक्ति नियमों के अनुरूप नहीं है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
जांच के बाद अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। प्राथमिक जांच मे ही इतनी त्रुटिया पायी गई है तो संबंधित गंगा स्व सहायता समूह के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
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1 thought on “पसान राशन दुकान जांच में बड़ा खुलासा! समूह गायब, विक्रेता चला रहा था पूरा सिस्टम? अब प्रशासन से नियुक्ति पर उठे सवाल”
बहुत अच्छा पोस्ट