रायपुर। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने मोहर्रम और अन्य इस्लामी धार्मिक आयोजनों को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। मुहर्रम और अन्य इस्लामी धार्मिक आयोजनों से पहले छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने मस्जिद समितियों, दरगाह समितियों और आयोजनकर्ताओं को एक परामर्श (एडवाइजरी) जारी कर अपील की है। वक्फ बोर्ड ने कहा कि सूबे की तमाम ताजिया कमेटियों, दरगाह कमेटियों, उर्स कमेटियों, मुतवल्लियन इंतजामिया कमेटी एवं तमाम जिम्मेदारां को गुजारिश की जाती है कि मोहर्रम, उर्स एवं दीगर इस्लामी तकरीबात का एहतमाम सिर्फ कुरआन-ए-करीम, अहादीस-ए-मुबारका और शरीअत-ए-मुतहहरा के मुताबिक किया जाए। मोहर्रम, उर्स व दीगर मजहबी तकरीबात में डीजे, धुमाल, बैंड-बाजा, नाच-गाना, आतिशबाजी व तमाम गैर-शरई और गैर-मुनासिब सरगर्मियों की किसी भी सूरत में इजाजत नहीं दी जाएगी। बोर्ड ने कहा कि यह भी हिदायत दी जाती है कि किसी भी जुलूस, उर्स या मजहबी तकरीब में गैर-शरई उमूर, डीजे, धुमाल, बैंड-बाजा, आतिशबाजी या दूसरी (प्रतिबंधित) सरगर्मियां पाई जाने पर संबंधित कमेटी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जरूरत पड़ने पर संबंधित कमेटी को भंग किया जाएगा साथ 50000 का जुर्माना लगाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित कमेटी पर होगी। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड तमाम मुसलमानों से अपील की है कि मोहर्रम को हजरत इमाम हुसैन और शुहदा-ए-कर्बला की अजीम कुर्बानियों की याद में इबादत, सब्र, सादगी, अखलाक और मजहबी अदब के साथ मनाएं व हर उस अमल से परहेज करें जो शरीअत-ए-इस्लामिया के खिलाफ हो।










