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आम जनता पर दोहरी मार: फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम! जानें नया रेट

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की तपिश और डॉलर के मुकाबले टूटते रुपये का सीधा खामियाजा एक बार फिर देश की आम जनता को भुगतना पड़ा है। देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल ने आज सुबह ठीक 6 बजे ईंधन की नई दरें जारी कर आम आदमी की जेब पर एक और बड़ा बोझ डाल दिया है। राहत की बात सिर्फ इतनी रही कि इस बार रसोई गैस यानी एलपीजी के उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिली है और उसकी कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन पेट्रोल और डीजल के मोर्चे पर हुआ यह इजाफा मध्यम वर्ग के मासिक बजट को पूरी तरह बिगाड़ने वाला है।

अगर देश के प्रमुख महानगरों की बात करें, तो इस मूल्य वृद्धि के बाद ईंधन के दाम अब रिकॉर्ड स्तर की तरफ बढ़ रहे हैं। देश की राजधानी दिल्ली में आज पेट्रोल की कीमतों में 87 पैसे की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके बाद यह 98.64 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, माल ढुलाई और आम परिवहन की रीढ़ माने जाने वाले डीजल में भी 91 पैसे का तगड़ा उछाल आया है, जिससे दिल्ली में अब एक लीटर डीजल के लिए 91.58 रुपये चुकाने होंगे। पूर्वी भारत के सबसे बड़े केंद्र कोलकाता में तो स्थिति और गंभीर है, जहाँ पेट्रोल का मीटर 109.70 रुपये और डीजल 96.07 रुपये प्रति लीटर को छू चुका है। उधर दक्षिण के प्रमुख महानगर चेन्नई में भी आज 19 मई से पेट्रोल 104.49 रुपये और डीजल 96.11 रुपये प्रति लीटर की दर से जनता की जेब खाली कर रहा है।

यह बढ़ोतरी आम जनता को इसलिए ज्यादा चुभ रही है क्योंकि अभी महज कुछ दिन पहले ही तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में एकमुश्त तीन-तीन रुपये का भारी इजाफा किया था। उस झटके से लोग अभी संभल भी नहीं पाए थे कि आज सुबह फिर से कीमतें बढ़ा दी गईं। दरअसल, इस आक्रामक मूल्य वृद्धि के पीछे तेल कंपनियों के अपने आर्थिक समीकरण और मजबूरियां काम कर रही हैं। इस बढ़ोतरी से पहले घरेलू तेल कंपनियों का दैनिक घाटा लगभग एक हजार करोड़ रुपये प्रतिदिन के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में की गई इस लगातार बढ़ोतरी के बाद कंपनियों का यह घाटा घटकर अब लगभग 750 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गया है, लेकिन इसके बावजूद उन पर दबाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है।

https://cgcitynews.in/1124  बाजार के जानकारों  का स्पष्ट मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतें और डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का कमजोर होना तेल कंपनियों के मार्जिन को पूरी तरह लील रहा है। कंपनियों का 750 करोड़ रुपये का दैनिक घाटा अब भी एक बड़ा वित्तीय जोखिम है। ऐसे में जब तक वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें नीचे नहीं आतीं या फिर सरकार टैक्स में कटौती करके दखल नहीं देती, तब तक आने वाले दिनों में आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल के मोर्चे पर महंगाई के ऐसे और भी कड़वे घूंट पीने के लिए तैयार रहना होगा।

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Author: CG City News

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